New Year Puja - You Should Be Satisfied Within 31st December 2001 Date : Kalwe Place Type Puja Hindi & English Speech Language CONTENTS | Transcript 01 - 04 Hindi English Marathi || Translation 05 - 08 English Hindi 09 - 10 Marathi ORIGINAL TRANSCRIPT HINDI TALK Scanned from Hindi Chaitanya Lahari देर हो गई और आप लोगों की प्रेम की आप कर रहे हैं कि सिर्फ इस शक्ति को शक्ति मुझे खींच के लाई है यहाँ । कुछ तो अपने लिए, अपने बच्चों के लिए आप आपकी माँ की तबियत ठीक नहीं है और इस्तेमाल करें? ये बहुत जरूरी है क्योंकि इच्छा शक्ति जबरदस्त है। उसी के बूते मैंने देखा है कि पार होने पर भी लोगों में दोष रह जाता है। पूर्णता आनी चाहिए। पर चल रहा है। मैं चाहती हूँ आप लोगों की भी इच्छा जब तक आप दूसरों से संबंधित हो कर शक्ति जबरदस्त हो जाए। इस मामले में के सहजयोग का कार्य न करें, आपको आपने क्या किया वो खुद ही सोचना चाहिए। पता ही नहीं चलेगा कि आप के अंदर अपनी ओर नज़र करके देखें कि आपने इसमें कौन सी मेहनत की? आप ध्यान लोग आते हैं और पैसा बनाते हैं। ऐसे करते हैं, ध्यान में आप गहनता लाएँ और बहुत से लोग हैं जो सहजयोग में आने के सोचिए कि आप एक संत हैं। और आपको बाद पैसा बनाते हैं बाद में जरूर वो खुल क्या करना चाहिए? माँ ने आपको संत जाते हैं, दिखाई देता है और बेकार परेशानी बना दिया है। अब आपको आगे क्या करना होती है। सो फायदा क्या? चाहिए? अपनी दुरुस्ती तो करनी है। इसमें कोई शक नहीं । आगे आपको क्या करना आप यहाँ धर्म बाँधने आये हैं। और धर्म को चाहिए? अपनी दुरुस्ती आप करिए, पर मानना चाहिए। और बंबई शहर में हमने उसके बाद जब वो फलीभूत हो गई और सुना है कि अनेक तरह के अधर्म चल पड़े जब पूर्णत्व को आप पहुँच गए, तब आप हैं जो 20-25 साल पहले यहाँ बिल्कुल क्या कर रहे हैं? तब भी आप सिर्फ ध्यान नहीं थे। एक तो आजकल के सिनेमा जो में जाते हैं या प्रोग्राम में जाते हैं और वहीं बन रहे हैं, उसकी शुद्धता बहुत कम है। कौन से दोष रह गए हैं। यहाँ तक कि | आप यहाँ पैसा कमाने नहीं आए हैं । ऐसे सिनेमा देखना ही नहीं चाहिए। आप तक चलता है। इसके आगे क्या किया? आपको ये दान मिला है आपकी आत्मा के इतने लोग ऐसे सिनेमा न देखें तो वो आधार से। आत्मा ने आपको पुनर्जन्म दिया, सिनेमा चलेंगे ही नहीं और वैसे चल भी तो आप इससे आगे क्या कर रहे हैं, ये नहीं रहे हैं । पर जो गन्दे सिनेमा होएंगे वो आपको देखना चाहिए। कौन सी प्रगति लोगों को पसन्द नहीं। लोग चाहते हैं कि Original Transcript : Hindi अच्छे ऐसे सिनेमा बने कि जिसको कुटुम्ब ओर नजर करें और नजर से देखें कि जा कर देख सके । एक ये बात हो गई और भी अत्यंत हैं। इसी को हम कहते हैं कि आप अपनी मलेच्छ, गन्दे तरीके से लोग गन्दी -गन्दी चीजें पढते हैं आप लोग महीं पढ़ते नहीं हैं। मैं मानती हैं। पर अखबार जाएँगे। क्या फासदा हैं इन दोषों को रखने में भी । से। उससे किसी को आज तक फायदा आपके अंदर अभी तक कौन से दोष वचे सफाई करो। । आप लोग उससे जो दोष हैं वे पूरी तरह से नष्ट हो निर्मल तत्प अपने अंदर लाएं बहुत अश्लील चीजें लिखी जाती हैं सौ सबसे पहले अपने को निर्मल कर लेना नहीं हुआ। अधिकतर लोग तो जेल ही चाहिए सबसे बहुत है लोगों में कि उनकी चले गए और जो नहीं गए हैं उन पर लोग आँखें चारों तरफ दौड़ने लगती हैं। जिनकी थूकते हैं। इसलिए आप लोगों से मुझे ऑँखे इधर-उधर दौड़ती हैं बो बताना है एक ही बात कि आप दूसरों के हैं ही नहीं। ऑँखे स्त्ध, निश्चल होनी दोषों की तरफ मत देखिए । अपने दोपों चाहिए। ये पहली पहचान है। गर अब भी की तरफ देखिए और देखिए कि आप में ऑखें इसकी तरफ, उसकी तरफ ऐसे दौड़ती क्या दोष हैं तो इसे कहना चाहिए, अभी आप के अब भी आँख में लालसा है? और सहजयोगी नहीं। दूसरे लालच। आप में अगर अब भी ये खरीदें, वो खरीदें, ये लाएँ, बो लाएँ। ये लालच बाकी है तो आप सहजयोगी नहीं सबसे ज्यादा अमेरीका में था लेकिन हो सकते। और ये लालच एक दिन खुल America एक दम बड़े भारी आघात से दब जाएगी पहली चीज़ है लालच छूटनी ये खरीद, वो खरीद। चाहिए। पर श्री कृष्ण ने तो कहा है कि पहली खरीदना ही है तो ऐसी चीज खरीदो जो चीज़ है गुस्सा छूटना चाहिए। जब तक हाथ से बनी हो। जिसमें कल्पना हो, जिसमें गुस्सा आपको आए तो सोंचना चाहिए कि आपकी सृजन शक्ति दिखाई दे। ऐसे लोग आप अभी सहजयोगी नहीं हैं। किसी ने बेचारे जो इतनी बढिया-बढ़िया चीजें बनाते हमें गुस्सा होते देखा नहीं। सब लोग कहते हैं, उसको कोई नहीं खरीदता। फालतू की हैं कि माँ आप तो गुस्सा होते ही नहीं और कभी-कभी ऐसी बातें हो जाती कि उस न तो आमका भला होगा और न ही उन पर किसी को भी गुस्सा आ जाए, मैं कहती लोगों का जो इतनी अच्छी चीजें बनाते हैं। हैं, क्या फायदा? गुस्से से कोई फायदा हरेक चीज में अगर आप कलात्मक हो नहीं। सहजयोरगी है । गुस्सा आ में आता है? आप आपको Attraction है सब चीजों के लिए? गया पागल जैसे इसके चर जा, उसके घर जा। हाँ अगर काही चीजे खरीदते हैं । इन फालतू की चीजों से जाएँ। घर में हरेक चीज जो आए वो कलात्मक होनी चाहिए। पचासों बर्तन रखेंगे आज बताना मुझे ये है कि आप अपनी 2 Original Transcript : Hindi पर एक कायदे का बर्तन नहीं कारीगरों अपने यहाँ बगीचा लगा लिया। मतलब से ये जो बनी हुई चीजें हैं उनका संगोपन सौन्दर्य दृष्टि सबसे पहले सहजयोगियों में होना चाहिए. अगर आप सहजयोगी हैं। आनी चाहिए। फालतू की बहुत सी चीजें बेकार की चीजे आप खरीदते रहते हैं. घर के अंदर भरी हुई हैं आजकल क्योंकि जिनका कोई अर्थ नहीं। यहाँ तक मैंने बाजार हैं। बाजार में जाते हैं वहाँ कुछ हैं ऐसी जितनी भी चीजें हैं, उठा पर साड़ियोँ और एक भी साड़ी कायदे की कर होली कर दीजिए बेकार की चीजों नहीं अजीब- अजीय, उसमें व्या-क्या बना की प्लास्टिक का आजकल इतना हो देते हैं भूतों जैसी चीज। अच्छी सुन्दर और गया है कि गिलास भी ढूंढना हो तो वो ज्यादती है। देखा है कि औरतें साड़ियाँ खरीदेगी। साड़ियों खरीदते कल्पना से भरी हुई आप दो साड़ियां रखें, प्लास्टिक अरे ये तो बहुत में बनिस्थत आप 50 साड़ियाों लें । अपने देश तो प्लास्टिक इस्तेमाल नहीं कर सकती में अमी भी कलात्मकता का Appreciation प्लास्टिक की साडियाँ हो गई। प्लास्टिक है। उसको जानना है उसको समझना है। का ये हो गया। इतना उपयोग प्लास्टिक मैं देखती हूँ जय घरों में जाओ तो अजीब का आ गया है कि उससे आदमी बीमार पडने का बडा अंदेशा है । बच्चे मरते हैं। भूत जैसे रंग लगे हुए हैं । हैं। भूत जैसी Deo০ ं। सब कुछ है। तो जहाँ तक हो सके प्लास्टिक आप लोग सहजयोगी हैं जहाँ तक हो सके। समझना चाहिए कि कौन सी चीज सौन्दर्य पर आजकल सभी चीज़ में प्लास्टिक आ खासकर बम्बई में तो बड़ी मुश्किल तभी आप अपने जीवन को भी सुन्दर है कि यहाँ तक कि सोफा सैट भी प्लास्टिक का बनाते हैं। बैठना है तो प्लास्टिक में, औरत आप से मिले वो ये कहे कि बहुत ही पहनना तो प्लास्टिक, चलना तो प्लास्टिक बढ़़िया आदमी है बहुत ही सुन्दर है। और अब थोड़े दिन में मोटरें भी प्लास्टिक से की बनाएँगे सौ आपका प्लास्टिक से कोई आप सहजयोगी हैं । मैं ये और घरों को सौन्दर्य से सजाएगें यह नहीं कहती कि आप चौगा पहन के घूमो। पहली पहचान है। अगर सहजयोगी भूत ये नहीं है सजहयोग में। कायदे के कपड़े जैसा घूमता हो तो वो किस काम का। पहनिए। कायदे से रहें। कोई ऐसी बात कायदे से कपड़े पहनना, कायदे से बातचीत नहीं है कि जिससे आप साधू वाबा दिखाई करना, कायदे से सबसे व्यवहार करना, दें। । पर जो चीज़ सुन्दर-सुन्दर चीजों से अपने घर को आपके लिए हितकारी नहीं वो नहीं इस्तेमाल सजाना। फूलों से भी सजा सकते हैं करनी चाहिए। उससे दूर रहना चाहिए. ration R आप को इस्तेमाल महीं करें पूर्ण है और सौन्दर्य को समझना चाहिए। गया है। बनाऐंगे। कि जो आदमी आपसे मिले या जिस तरह से आप अपने को सौन्दर्यं सजाएगे इसी तरह से आप उसके वातावरण मतलब नहीं। कोई ढोंगबाज़ी नहीं 3 Original Transcript : Hindi और बच्चों को भी बचाना चाहिए दूसरी बात सहजयोग में मैंने देखा कि अब जिस दशा में आप आएँ अब आप उस सब लोग चाहते हैं कि मैं उनके धर जाऊँ। समाधान को प्राप्त हों और देखें कि आप आप क्यों नहीं समझते कि मैं आपके घर जो भी कर रहे हैं उससे आपको समाधान आऊँ, ऐसा आपने क्या किया? या फिर मिलें । जिसको देखो वही हमारे घर आना चाहता है! मैं कहीं भी जाती हैँ मुझे आराम से सहजयोग बढ़ाएँ आप बहुत समाधानी हो रहने नहीं देते आपने अभी कुछ भी नहीं जाएँगे आपको यह नहीं लगेगा कि माँ के किया है। आप किसी भी तरह से ये इच्छा बनी रहें अधिकतर मैंने ऐसा देखा है कि जो रहने दीजिए और ये सोचिए कि अभी लोग बहुत आगे-आगे करते हैं वो या तो आपकी औकात क्या है? आप क्या चाहते बेईमान होते हैं और या तो वो चोर होते हैं? ऐसी क्यों चाहत करें जिससे आपकी हैं। जो लोग दिल से साफ हैं और जो माँ को तकलीफ हो। ऐसे क्यों काम करना जैसे हम कहीं से आए, आकर सामने खड़े हैं। अब मैं चाहती हैँ कि अब ये समय आ हो गए। ऐसा नहीं करिए। समाधान अगर गया है कि आप लोग अब मेरे ऊपर सहजयोग में नहीं आया तो आप बेकार हैं। मेहरवानी करें क्योंकि मुझसे तो सब जहाँ भी हैं, माँ हमारे साथ हैं, इस प्रकार एक समाधानी वृत्ति होनी चाहिए। उसी से आप लोग ठीक नहीं हैं तो मेरी तबियत आपकी प्रगति होगी। जिस चीज़ की दुनिया खराब हो जाती है। इसलिए आप को में प्रगति होती है. वो सब कुछ समाधान में बिल्कुल ये निश्चय कर लेना चाहिए कि रत है। जब आम स हम ऐसे बने कि जिससे माँ जो है वो खुश समय आप दबते रहें सबके सामने तो हो जाएं और फिर उससे जो है दुनिया उससे क्या फायदा? समाधान से जहाँ आप बदल जाए। आज बहुत देर तक लोग बैठे हैं वहीं माँ है ऐसा जब आपको महसूस रहे, कुछ गए भी होंगे पहचान ये ही है होगा तभी माना जाएगा कि आप सहजयोगी कि आप यहाँ बैठे हैं। शान्ति में बैठे हैं हैं। जहाँ बैठे हैं, सामने आना, स्टेज पर पहले तो धूम धड़ाका सब लोग इतनी चढ़ना, इसकी ज़रूरत नहीं किसी समाधानी आदमी को। हमें सबके बारे में मालूम है शांत बैठे हैं ये मेरे लिए तो बहुत ही पर समाधान ऐसी चीज़ है कि जिससे कमाल ही चीज है । गहराई में आप मुझे पा सकते हैं और मैं आपको जान सकती हैं। मैं चाहती हैं कि आप सहजयोग में कार्यरत हों और सामने सारी चीजें रखें माँ के सामने खड़े 1 है वो अपने प्यार में मग्न रहते प्यार में रत Vibrations आप खींचते हो और अगर माघानी नहीं और पूरे जोर-जोर से चिल्लाते थे, बोलते थे अब परमात्मा आपको धन्य करें। 4 ENGLISH TRANSLATION (Hindi Talk) Today I got late and it is the power of your love which has brought Me here. Your Mother's health is little disturbed and the desire is very strong and things are working out because of that. I want that your power of desire should get stronger, too. You should think for yourself what you have done in this regard. You should introspect and see that what hard work have you done for it. You meditate.... You should bring depth in your meditation. You should think that you are a saint and see what you should do. Mother has made you a saint and now what should you do? You have to make yourself all right. No doubt, you should make yourself all right, but after that when it is done, then what do you do? You go in collectivity. You go into programs and it is limited to that. What have you done further? You have got this blessing through your spirit. Spirit has given you second birth, so you should see further now what are you doing? How are you progressing or are you are using it only for yourself and for your children? It is very important because I have seen that even after getting Self Realization, people have short-comings. They are not completely cleansed. If you don't get one together with the others and work for Sahaj Yoga, then you will never come to know that what short-comings and negative aspects you have within. Even people come and make money.... There are many people who come to Sahaj Yoga and make money. Later on they are exposed, no doubt, and can be seen, but unnecessarily it is troublesome, so what is the use? You have not come here to make money. You have come here to awaken your dharma. You should establish dharma. I have heard that in Bombay many kind ofadharmas have started, which were not at all here in the past twenty-five years should not at all see such films. If you people don't see such movies, then they will not be shown at all, they cannot run. You can understand it that no one likes such movies. People want that such movies should be made which the whole family can go and see together. This is one thing and there are all these filthy and stupid horrible kind of books that are read nowadays. I know that you people don't read them. But even in the newspapers they write many obscene things. So you have to make yourself nirmal [pure]. It is seen that the eyes of the people run here and there. Those people are not Sahaj Yogis at all whose eyes flitter here and there. Your eyes have to be steady. This is the first sign of a Sahaj Yogi. If still your eyes are moving here and there, then you should say that he is not yet a Sahaj Yogi. Second thing is greed. If still you have greed, then you are still not a Sahaj Yogi and this greed will be exposed one day. especially the films. There is very little purity in them. You First thing is that this greed should go away. Shri Krishna has said that you must drop your anger. If you get angry, then you should think that you are not a Sahaj Yogi. Nobody has seen Me getting angry. Everyone says that, 'Mother we have not seen you getting angry.' There are situations in which anyone can get angry, but I say, 'What is the use?" There is no use. What I have to tell you today is that you should introspect and see all the weaknesses you have even now. So I tell you the same thing, that you should cleanse yourself. You should have the nirmal tattwa in you. All your weaknesses should go away from that. What is the use of keeping these weaknesses within? Many of them have gone to jails and those that haven't, people spit on them. I want to tell you only one thing, that don't look at the weaknesses and faults of others. Instead, you should see the faults within yourself. Do you still get angry? Do you still have desire in your eyes and do you have attraction for everything, always thinking to buy this and buy that, to bring this and bring that? This was the most in America, but America today got pressed by a big shock. Like a mad person buys this ... but if you have to purchase, only then purchase such things which are made by hand, which has art in it and you can see the creativity in it. There are so many artists who 5 English Translation (Hindi Talk) make such nice things and no one will buy them. They will buy all unnecessary things. By these things neither you will be benefited nor those who make such beautiful things. You should get artistic. All the things in the house should get artistic. They will keep fifty kinds of utensils in the house and you find not even one proper utensil. There should be utilization of handmade, artistic things by you, if you are Sahaj Yogis. You keep on buying the things which have no use. The women will keep buying one sari after another and not even one sari will be proper – all such saris, in which they make so weird [perhaps "strange" would be better] things like bhoots. You should keep two saris which are nice, handmade and beautiful instead of keeping fifty saris. In our country still there is no appreciation of art and creativity. When I go to some house I see that they have painted their houses with weird [perhaps “strange" would be better], bhootish colours, bhootish decorations. You are Sahaj Yogis and you should understand what object is beautiful and understand beauty. Only then will you be able to make your life beautiful and so that any man or women who meets you will say that what a nice man or women he or she is. As beautifully you will decorate yourself... in the same way, you should decorate your environment and houses. It is the thing to see, that if a Sahaj Yogi is roaming like a bhoot, then what is the use of such Sahaj Yogi. To wear the clothes properly, to talk properly, to behave properly with others, to decorate your house with beautiful things.... You can decorate your house with flowers also. Have a garden means you should have the vision of beauty in Sahaj Yogis. There are so many useless things stored in the house because there are markets and they go to markets and buy all useless things. You should burn the Holi [festival in India when they play colors, but one night before they burn the big fire] of all such useless things. This plastic has become so much important now. Even if I have to search for a glass, it will be of plastic. I said it is too much. I cannot use plastic. There are saris of plastic. Use of plastic has come that there is great possibility of human beings getting sick out of it. Children die by plastic. As much as possible, you should not use plastic. But now plastic has come in everything. Especially in Bombay, even the sofa set is made of plastic. To sit on plastic, to wear plastic, to walk on plastic and after some time the cars will also be of plastic. So you /Sahaj Yogis] have no concern with plastic. I don't say that you should wear a gown and walk in Sahaj Yoga. You should wear proper clothes, no such thing is there that you look like a sadhu baba [Hindu saints who leave their home and family], no such artificiality, but you should be away from all such things which are not auspicious for you. You should not use it and you should save your children from it. Second thing which I have seen in Sahaj Yoga is that everyone wants that I must visit their houses. Why don't you understand that what have you done that I should come to your house? Or whomever you see wants to come to My house. Wherever I go, you should leave Me peaceful. You have not done anything till now. You should leave this kind of desire in your mind and think that what is your aukat [status]? Why do you desire such a thing, which can give trouble to your Mother? Why to do such things like.... I come from somewhere and they stand in front of me. Not to do like this. If you don't have samadhan [ultimate satisfaction] in Sahaj Yoga, then you are of no use. 'Wherever I am, Mother is with me.' Such kind of samadhan should be within you. You will grow with this. Anything which grows in this world is all absorbed in samadhan. If you are not samadhani and keep running in front of everyone all the time, what is the gain from that? With samadhan, Mother is there where you are. When you think like this then you will be considered a Sahaj Yogi. Wherever you are sitting...coming in front of Me ... coming on stage... it is not required for a Sahaj Yogi. 6. I know about everyone. Samadhan is such a thing that in the depth of it you can meet Me and now the time has come where you should achieve samadhan. You should see that whatever you are doing, you should get satisfaction. You should come forward to spread Sahaj Yoga and work for Sahaj Yoga, you will see that you will achieve the samadhan. You will not feel like coming in front of Me and telling Me everything. Most of the time, I have seen that all those who come too much forward and in 6. English Translation (Hindi Talk) front of Me are either dishonest or thieves.../short pause]. Those who are clean in heart and are enjoying the love are lost in thejoy of love within. So now I want to tell you that the time has come that you should have a little consideration for Me because you absorb all the vibrations from Me and if you people are not all right, then I get sick. So you have to decide seriously that we should become such that Mother should be happy to see us and then the whole world should change. You had to sit for a long time today and many people have gone, but the recognition is this that you people are sitting peacefully in front of Me. Before it used to be that people used to talk and shout, make noise, but you are sitting peacefully. This is very great thing for Me. I'm telling them that how a Sahaja Yogi should feel. You should be satisfied people. Firstly and foremost you have to be satisfied. You just see within yourself if you are satisfied or not. You've got the highest that you wanted, you have got the peace, you've got the joy, and all the blessings of the Divine. Despite that, if you are dissatisfied, you want to do something always that is disturbing. Always some people want to show Me off, want to come forward – or they want to escape Sahaja Yoga. Firstly, you must spread Sahaja Yoga. How many people have you brought to Sahaja Yoga? Just think of it! We are Sahaja Yogis – Sahaja Yogis means what? You are saints! In this world all the saints who became saints, with very great difficulty, going through lots of tortures, have done so much work. One single saint has so many people whom they have attracted. Of course he couldn't give them Realisation, because I have taught you how to do that. But you just find out what are you doing about Sahaja Yoga. Only meditation is not the point. Meditation for what? For equipping yourself to help others; we need it very much in this Kali Yuga, people who will go all out to help. On the contrary, I find that they are very anxious just to meet Me, to see Me. I have seen all the Indians who come to Cabella must meet Me, must see Me, as if they have a special right with Me. What is the need? What is the need to meet Me? But this is the trouble of, say, our conditioning, that supposing there is some leader, some Minister coming, everybody will go and show off, like to meet him and talk to him – but not a Sahaja Yogi. You must have self-esteem. Self-esteem by which you should know what is your dignity and how you should be. There are Sahaja Yogis who are excellent, who are very good, who are very self satisfied–I know who they are. And you have to be like that, otherwise you cannot enjoy Sahaja Yoga, you are like all other people trying to hinder into all nonsensical activities. Now this is it. Today's was a real test, because I just couldn't come earlier. You know what is the traffic nowadays, I just couldn't arrive; and still you were sitting here – this gives me great satisfaction. That they really love Me, and they are really Sahaja Yogis. If you really love Me you must love others who are not Sahaja Yogis and try to give them Realisation. Because you know My age is quite a lot, and how far can I go? I am not going now to many countries, but Sahaja Yoga is growing fast, though I am not going there. It is growing – why? Because people of that country understand their responsibility. You should know what is your responsibility- it is not only towards yourself but it is for the rest of the world, (that) you have to work it out and do something about it. Whatever people you can approach, or whatever people you can meet, go all out! I have also said before, I have seen people who go to some horrible gurus go on talking about their guru, describing their guru. Anybody who meets them, they go on telling them. Not Sahaja Yogis. I don't know, maybe they want to preserve their Realisation. They think if they tell somebody their Realisation will drop out. If you don't spread Sahaja Yoga, what is the use of getting your Realisation? All my labour is wasted on such people, who are for themselves. They want something for themselves. Now for example, so many girls wanted to marry. There are four times more, five times more than all the boys put together. But if they are not married, they feel very unhappy about it. Doesn't matter! You are now connected to God! Marriage is not always a very great blessing, I tell you, it's not. On the contrary, it can be very binding, it could be very troublesome. So better not feel bad. You should feel English Translation (Hindi Talk) bad when you cannot give Realisations to others. How many people have I given Realisation? Just think about it. All the time, like all the ordinary people, thinking about marriage, and this and that. It's not going to help you. You are something special. And what speciality do you have? What are you doing about it? I'm sorry at the end of this, our great Ganapatipule, I have to tell you this. But sometimes one has to tell, also. I know you are all, all very good Sahaja Yogis. Also that you have achieved so much. But what is My desire is, that all of you should become like a light and start spreading Sahaja Yoga. In some countries it has happened, it is working out, and people feel so responsible. I am amazed at them, how they are spreading Sahaja Yoga. Now the same request I have to make to you. That please look at yourself, introspect, what have you done? What have you achieved in Sahaja Yoga? Such a satisfaction lies when you really, when you really work hard to spread Sahaja Yoga. Many people think that coming nearer Me I feel pleased – I am not. That's no recognition. You should never do that. On the contrary, when you will grow really, I will know, Myself. Today is not the day I should have said all this, because it is the day for New Year's Day. But only good decisions are to be taken on the New Year's Day – that's the custom with human beings. So today you all have to take the decision that 'What are we doing for Sahaja Yoga?' 'What are we giving Sahaja Yoga?' 'What is our achievement?" 'Are we sharing with others?' It's the greatest Truth you have got. Nobody got it– people worked so hard, did so much – nobody could give Realisation! It's only you can give Realisation, it's very surprising. Kabir could not give Realisation to anybody. Gyanadeva could not give Realisation to anybody. All of them have been great, great Saints of great value system and with great understanding. Whatever poetry they have given, people are singing- that's all. But, they cannot give Self Realisation which you can do. With all that power, if you are not giving Realisation, what's the use of giving power to someone like that? So today's New Year's message is that 'Next year you must give Self Realisation to many people. (To) How many people have you given Realisation?' That's the main thing. Just find out. What have you done throughout the year? I don't know how to count it. But you, yourself count. 'What have we done all these years?' 'What have we achieved?' Attending My Puja is no favour to Me. Or doing anything for the Puja is no favour to Me. My greatest Puja is that of human beings; and if you can achieve and spread Sahaja Yoga that fast, I'll be very, very grateful to you. I have worked very hard, I have really worked very hard. This Body, this Mind, all My Health, everything, I have done for saving people. And you please also tonight decide and take a view that what Mother is saying is very important and precious. We have to, we have to rise and give Realisation to people. But which is not so common-I am surprised why people are behaving in this manner who are Realised Souls. All my blessings for the New Year, for all of you 'Happy New Year'! But – next year should be full of many Sahaja Yogis who have done work and who have achieved something great. May God bless you! 8. MARATHI TRANSLATION (Hindi Talk) Scanned from Marathi Chaitanya Lahari आपल्या सर्वांच्या प्रेमाखातर मी इथे आले आहे. माझी प्रकृति तशी ठीक नाहीं पण इच्छाशक्ति जबरदस्त आहे. म्हणूनच सर्व काही व्यवस्थित बालले आहे. तुम्हा सर्वांची इच्छाशक्ति पण अशीच जवरदस्त व्हायला हवी असे मला वाटते. त्याबाबतीत आपण करत आहोत हे तुमचे तुम्हीच पाहयचे अहे. आपण काय करती व काय करायता पाहिले याचा तुम्ही स्वत:शीच वबिचार करायला हवा. आत्म्याकडून तुम्हाला पुनर्जन्म दिला आहे, भ्रान्तिमधून बाहेर काढले आहे तेव्हां त्यातून पुढची प्रगति साध्य करण्याकडे तुम्ही लक्ष द्यायला हवे; आपल्याला मिळालेल्या शक्तीचा उपयोग केला पाहिजे, जोपर्यंत दुसऱ्या लोकांना सहजयोग सांगून जागृत करण्याचे कार्य तुम्ही करत नाहीं तोपर्यंत तुम्हाला मिळालेली शक्ति तुम्ही समजूच शकणार नाही व तुमचे दोष ি तुम्हाला समजणार नाहीत. मी बरेच लोक-असे बघितले आहेत की ते सहजयोगांत आल्यावरही पैसा कमवायच्या मार्ग असतात. काही जण त्यातून सुधारतात. पण अशा संवयींचा फायदा काय? आजकाल या मुंबई शहरामधें लोकांना सिनेमाचा घोक आहे, तसे मुंबईमधे बच्याच अधार्मिक गोष्टी चालतात. आजकालच्या सिनेमांत अशुध्दता मोक्या प्रमाणात दाखवतात; खरे तर सगळ्या कुटुंबाला बरोबर पेऊन बपण्यासारखा सिनेमा लोकांना आवडेल. त्याच प्रमाणे गल्ली-गल्ली मधून अत्यंत वाईट प्रकारचे धंदे चालतात. वर्तमानपत्र ब मासिकांत अश््ील गोष्टी छापून बेतात. हे सर्व सुधारले पाहिजे व बातावरण निर्मल झाले पाहिजे. त्यासाठी दृष्टिमधे निर्मलपणा आला पाहिजे. स्तब्ध व निश्चल नजरेत पावित्य असते; ज्याची नजर सदैद भरकटत राहते तो सहजयोगी जहेच. दुसरी गोष्ट म्हणजे लोभ व हांवः कसल्याही गोष्टीच लोभ वाटता कामा नये. त्याचप्रमाणे राीटपणा सुटला पाहिजे. ज्याला राग येतो तो सहजयोगी नाही. राग मनातूनही गेला पाहिजे. कळवा पुजा प.पू.श्रीमाताजी निर्मला देवींचे भाषण,(सारांश) कळवा, ३१ डिसेंबर २००१ ८ ा सर्वात महत्वाची गोष्ट म्हणजे समाधान, तुम्ही जेव्हा सहजयोगाचे कार्य करता तेव्हा तुम्हाला फार समाधान मिळते. आपण जे कांही करतो त्यातून समाधान मिळाले पाहिजे. सहजयोगाच्या कार्यातही समाधान मिळवले पाहिजे. नुसते सगळे श्रीमाताजीना माहीत आहे असे समजण्यांत अर्थ नाही. सहजयोगांतही ज्यांना सारखे पुढे येण्याची धडपड असते त्यांत अधिकतर बेईमान व चोर तोक असतात,जे लोक अंत:करणाने साफ असतात व प्रेमाने क्यवहार करतात ते समाधानात असतात. आतां मला वाटते की समय आला आहे; तेव्हां तुम्ही माझ्यावर एक मेहरबानी करा; तुम्ही माझ्याकडू न व्हायद्रेशन्स खेचून घेत असल्यामुळे तुम्ही जर सहजयोगी म्हणून ठीक नसाल तर माझी पकृति बिघडते. तेव्हा तुम्ही आता, निश्चय केला पाहिजे की ज्यामुळे श्रीमाताजींना बास होऊन त्यांची तब्येत बिघडेल असे तुम्ही कांहीं करणार नाहीं सहजयोगी ग्हणवूल घ्यायला आपण लायक राहिलो नाही तर श्री माताजी ना त्रास होईल. वे मला प्रसन्नता मिळेल असे बागाल. आपल्याला जग बदलायचे आहे. इ्े तुम्ही बराच वेळ बसून आहात. तुम्हीं तरीही निरवंतपरणे शांता राहण्यांत तुमची खरी ओळख आहे. तुम्हाला असे शांत असल्याचे पाहण्यात मला फार आनंद होत असतो. म्हणून सहजयोग्यांनी स्वतःअद्दल फार काळजीपूर्वक राहिले पाहिजे. नुसते रोज ध्यान करण्याने कांही साध्य होत नाहीं. तुम्ही सहजयोगात दुसर्यांना मदत करण्यासाठी, या कलियुगातून Marathi Translation (Hindi Talk) त्यांना बाचवण्यासाठी आला आहात. नुसते मला आपण सहजयोगासाठी काय केले, काय करतो हकडे लक्ष द्या. भेटम्यासाठी' वा माझे जवळून दर्शन होण्यासाठी धडपड़ण्याला अर्थ नाही. सहजयोगाच्या प्रसारासाठी अंग झटन कार्य करणे यासारखी समाधानकारक भारतीय सहजयोग्यांत ही प्रवृति जास्त आहे. सहजयोग्यांती आपला व आनंददायक गोष्ट नाही. नवीन बर्ष सुर होतांना कांहीतरी नवीन संकल्पना आत्मसन्मान राखता पाहिजे. सामान्य लोकांसारख वामलात तर तुम्हाला निश्चित करण्याची प्रधा आहे. म्हणून आज तुम्ही प्रत्येकाने आपण सहजयोगाचा खरा आनंद मिळणार नाहीं, माझ्यावर जितके तुम्ही सहजयोगासाठी बाय करणार याचा निश्चय करा. नुसत्या माझी पूजा करण्याचा प्रेम करतां तसेच प्रेम आजून सहजयोगांत न आलेल्या किंवा पूजा-कार्यक्रमासाठीं काम करण्याचा कांही फायदा नाही. लोकांबद्दलही तुम्हाल्ा वाटले पाहिजे. आत्मसाक्षात्कार देण्याची तळमळ तुमच्यांत असली पाहिजे, मी आता नाहीत; मोठ-मोठ्या] संत पुरुषांनीही ते बमले नाहीं; पण तुम्हाला ती परदेशांत कमी जाते पण तिथे सहजयोग बाढहत आहे कारण त्या लोकांना शक्ति मिळाली आहे. म्हणून सहजयोगाचा प्रसार करण्याचा व जास्तीतजास्त त्याची जबाबदारी आपल्यावरच आहे हे समजले आहे. म्हणून तुम्ही लोकांना जागृति देण्याचा ठाम निश्चय आज करा. सहजयोगाचें असे कार्य सहजयोग सतत लोकांना सांगत राहिले पाहिजे. नाहीं तुम्ही केलेत तर तुमचेच माझ्यावर मोठे उपकार होणार आहेत, व जगभर तर तुम्हाला मिळलेला आत्मसाक्षात्कार व्यर्थ होईल, तीच गोष्ट सहज रहजयोग पसरवण्याचे माझे स्वप्न साकार होणर आहे; त्यांतच माझ्या विवाहाची, सहजयोगांत विवाह जमलाच पाहिजे म्हणून अस्वस्थ होऊ आजप्यंतच्या परिश्रमांचे सार्थक होणार आहे. नका. गणपतिपुळयातही मी त्याबद्दल बोलले आहे: सेमिनारमधे असे बोलायला बरं वाटत नाहीं पण या गोष्टी महत्वाच्चा असल्यामुळे सांगाव्या लागतात. माझी इच्छा हीच आहे की तुम्ही तेजस्वी तान्यांसारखे बनावे व आपला प्रकाश सगळीकडे पसरवा। त्यासाठीं सतत आत्मपरीक्षण कर्न स्याना आत्मसाक्षात्कार देण्यावी शक्ति आजपर्यंत कुणी मानवाला देऊ शकले का नववर्षाचे तुम्हाला अनंत आशीर्वीद, 10 ---------------------- 20011231_New Year Puja - You Should Be Satisfied Within_Kalwe.pdf-page0.txt New Year Puja - You Should Be Satisfied Within 31st December 2001 Date : Kalwe Place Type Puja Hindi & English Speech Language CONTENTS | Transcript 01 - 04 Hindi English Marathi || Translation 05 - 08 English Hindi 09 - 10 Marathi 20011231_New Year Puja - You Should Be Satisfied Within_Kalwe.pdf-page1.txt ORIGINAL TRANSCRIPT HINDI TALK Scanned from Hindi Chaitanya Lahari देर हो गई और आप लोगों की प्रेम की आप कर रहे हैं कि सिर्फ इस शक्ति को शक्ति मुझे खींच के लाई है यहाँ । कुछ तो अपने लिए, अपने बच्चों के लिए आप आपकी माँ की तबियत ठीक नहीं है और इस्तेमाल करें? ये बहुत जरूरी है क्योंकि इच्छा शक्ति जबरदस्त है। उसी के बूते मैंने देखा है कि पार होने पर भी लोगों में दोष रह जाता है। पूर्णता आनी चाहिए। पर चल रहा है। मैं चाहती हूँ आप लोगों की भी इच्छा जब तक आप दूसरों से संबंधित हो कर शक्ति जबरदस्त हो जाए। इस मामले में के सहजयोग का कार्य न करें, आपको आपने क्या किया वो खुद ही सोचना चाहिए। पता ही नहीं चलेगा कि आप के अंदर अपनी ओर नज़र करके देखें कि आपने इसमें कौन सी मेहनत की? आप ध्यान लोग आते हैं और पैसा बनाते हैं। ऐसे करते हैं, ध्यान में आप गहनता लाएँ और बहुत से लोग हैं जो सहजयोग में आने के सोचिए कि आप एक संत हैं। और आपको बाद पैसा बनाते हैं बाद में जरूर वो खुल क्या करना चाहिए? माँ ने आपको संत जाते हैं, दिखाई देता है और बेकार परेशानी बना दिया है। अब आपको आगे क्या करना होती है। सो फायदा क्या? चाहिए? अपनी दुरुस्ती तो करनी है। इसमें कोई शक नहीं । आगे आपको क्या करना आप यहाँ धर्म बाँधने आये हैं। और धर्म को चाहिए? अपनी दुरुस्ती आप करिए, पर मानना चाहिए। और बंबई शहर में हमने उसके बाद जब वो फलीभूत हो गई और सुना है कि अनेक तरह के अधर्म चल पड़े जब पूर्णत्व को आप पहुँच गए, तब आप हैं जो 20-25 साल पहले यहाँ बिल्कुल क्या कर रहे हैं? तब भी आप सिर्फ ध्यान नहीं थे। एक तो आजकल के सिनेमा जो में जाते हैं या प्रोग्राम में जाते हैं और वहीं बन रहे हैं, उसकी शुद्धता बहुत कम है। कौन से दोष रह गए हैं। यहाँ तक कि | आप यहाँ पैसा कमाने नहीं आए हैं । ऐसे सिनेमा देखना ही नहीं चाहिए। आप तक चलता है। इसके आगे क्या किया? आपको ये दान मिला है आपकी आत्मा के इतने लोग ऐसे सिनेमा न देखें तो वो आधार से। आत्मा ने आपको पुनर्जन्म दिया, सिनेमा चलेंगे ही नहीं और वैसे चल भी तो आप इससे आगे क्या कर रहे हैं, ये नहीं रहे हैं । पर जो गन्दे सिनेमा होएंगे वो आपको देखना चाहिए। कौन सी प्रगति लोगों को पसन्द नहीं। लोग चाहते हैं कि 20011231_New Year Puja - You Should Be Satisfied Within_Kalwe.pdf-page2.txt Original Transcript : Hindi अच्छे ऐसे सिनेमा बने कि जिसको कुटुम्ब ओर नजर करें और नजर से देखें कि जा कर देख सके । एक ये बात हो गई और भी अत्यंत हैं। इसी को हम कहते हैं कि आप अपनी मलेच्छ, गन्दे तरीके से लोग गन्दी -गन्दी चीजें पढते हैं आप लोग महीं पढ़ते नहीं हैं। मैं मानती हैं। पर अखबार जाएँगे। क्या फासदा हैं इन दोषों को रखने में भी । से। उससे किसी को आज तक फायदा आपके अंदर अभी तक कौन से दोष वचे सफाई करो। । आप लोग उससे जो दोष हैं वे पूरी तरह से नष्ट हो निर्मल तत्प अपने अंदर लाएं बहुत अश्लील चीजें लिखी जाती हैं सौ सबसे पहले अपने को निर्मल कर लेना नहीं हुआ। अधिकतर लोग तो जेल ही चाहिए सबसे बहुत है लोगों में कि उनकी चले गए और जो नहीं गए हैं उन पर लोग आँखें चारों तरफ दौड़ने लगती हैं। जिनकी थूकते हैं। इसलिए आप लोगों से मुझे ऑँखे इधर-उधर दौड़ती हैं बो बताना है एक ही बात कि आप दूसरों के हैं ही नहीं। ऑँखे स्त्ध, निश्चल होनी दोषों की तरफ मत देखिए । अपने दोपों चाहिए। ये पहली पहचान है। गर अब भी की तरफ देखिए और देखिए कि आप में ऑखें इसकी तरफ, उसकी तरफ ऐसे दौड़ती क्या दोष हैं तो इसे कहना चाहिए, अभी आप के अब भी आँख में लालसा है? और सहजयोगी नहीं। दूसरे लालच। आप में अगर अब भी ये खरीदें, वो खरीदें, ये लाएँ, बो लाएँ। ये लालच बाकी है तो आप सहजयोगी नहीं सबसे ज्यादा अमेरीका में था लेकिन हो सकते। और ये लालच एक दिन खुल America एक दम बड़े भारी आघात से दब जाएगी पहली चीज़ है लालच छूटनी ये खरीद, वो खरीद। चाहिए। पर श्री कृष्ण ने तो कहा है कि पहली खरीदना ही है तो ऐसी चीज खरीदो जो चीज़ है गुस्सा छूटना चाहिए। जब तक हाथ से बनी हो। जिसमें कल्पना हो, जिसमें गुस्सा आपको आए तो सोंचना चाहिए कि आपकी सृजन शक्ति दिखाई दे। ऐसे लोग आप अभी सहजयोगी नहीं हैं। किसी ने बेचारे जो इतनी बढिया-बढ़िया चीजें बनाते हमें गुस्सा होते देखा नहीं। सब लोग कहते हैं, उसको कोई नहीं खरीदता। फालतू की हैं कि माँ आप तो गुस्सा होते ही नहीं और कभी-कभी ऐसी बातें हो जाती कि उस न तो आमका भला होगा और न ही उन पर किसी को भी गुस्सा आ जाए, मैं कहती लोगों का जो इतनी अच्छी चीजें बनाते हैं। हैं, क्या फायदा? गुस्से से कोई फायदा हरेक चीज में अगर आप कलात्मक हो नहीं। सहजयोरगी है । गुस्सा आ में आता है? आप आपको Attraction है सब चीजों के लिए? गया पागल जैसे इसके चर जा, उसके घर जा। हाँ अगर काही चीजे खरीदते हैं । इन फालतू की चीजों से जाएँ। घर में हरेक चीज जो आए वो कलात्मक होनी चाहिए। पचासों बर्तन रखेंगे आज बताना मुझे ये है कि आप अपनी 2 20011231_New Year Puja - You Should Be Satisfied Within_Kalwe.pdf-page3.txt Original Transcript : Hindi पर एक कायदे का बर्तन नहीं कारीगरों अपने यहाँ बगीचा लगा लिया। मतलब से ये जो बनी हुई चीजें हैं उनका संगोपन सौन्दर्य दृष्टि सबसे पहले सहजयोगियों में होना चाहिए. अगर आप सहजयोगी हैं। आनी चाहिए। फालतू की बहुत सी चीजें बेकार की चीजे आप खरीदते रहते हैं. घर के अंदर भरी हुई हैं आजकल क्योंकि जिनका कोई अर्थ नहीं। यहाँ तक मैंने बाजार हैं। बाजार में जाते हैं वहाँ कुछ हैं ऐसी जितनी भी चीजें हैं, उठा पर साड़ियोँ और एक भी साड़ी कायदे की कर होली कर दीजिए बेकार की चीजों नहीं अजीब- अजीय, उसमें व्या-क्या बना की प्लास्टिक का आजकल इतना हो देते हैं भूतों जैसी चीज। अच्छी सुन्दर और गया है कि गिलास भी ढूंढना हो तो वो ज्यादती है। देखा है कि औरतें साड़ियाँ खरीदेगी। साड़ियों खरीदते कल्पना से भरी हुई आप दो साड़ियां रखें, प्लास्टिक अरे ये तो बहुत में बनिस्थत आप 50 साड़ियाों लें । अपने देश तो प्लास्टिक इस्तेमाल नहीं कर सकती में अमी भी कलात्मकता का Appreciation प्लास्टिक की साडियाँ हो गई। प्लास्टिक है। उसको जानना है उसको समझना है। का ये हो गया। इतना उपयोग प्लास्टिक मैं देखती हूँ जय घरों में जाओ तो अजीब का आ गया है कि उससे आदमी बीमार पडने का बडा अंदेशा है । बच्चे मरते हैं। भूत जैसे रंग लगे हुए हैं । हैं। भूत जैसी Deo০ ं। सब कुछ है। तो जहाँ तक हो सके प्लास्टिक आप लोग सहजयोगी हैं जहाँ तक हो सके। समझना चाहिए कि कौन सी चीज सौन्दर्य पर आजकल सभी चीज़ में प्लास्टिक आ खासकर बम्बई में तो बड़ी मुश्किल तभी आप अपने जीवन को भी सुन्दर है कि यहाँ तक कि सोफा सैट भी प्लास्टिक का बनाते हैं। बैठना है तो प्लास्टिक में, औरत आप से मिले वो ये कहे कि बहुत ही पहनना तो प्लास्टिक, चलना तो प्लास्टिक बढ़़िया आदमी है बहुत ही सुन्दर है। और अब थोड़े दिन में मोटरें भी प्लास्टिक से की बनाएँगे सौ आपका प्लास्टिक से कोई आप सहजयोगी हैं । मैं ये और घरों को सौन्दर्य से सजाएगें यह नहीं कहती कि आप चौगा पहन के घूमो। पहली पहचान है। अगर सहजयोगी भूत ये नहीं है सजहयोग में। कायदे के कपड़े जैसा घूमता हो तो वो किस काम का। पहनिए। कायदे से रहें। कोई ऐसी बात कायदे से कपड़े पहनना, कायदे से बातचीत नहीं है कि जिससे आप साधू वाबा दिखाई करना, कायदे से सबसे व्यवहार करना, दें। । पर जो चीज़ सुन्दर-सुन्दर चीजों से अपने घर को आपके लिए हितकारी नहीं वो नहीं इस्तेमाल सजाना। फूलों से भी सजा सकते हैं करनी चाहिए। उससे दूर रहना चाहिए. ration R आप को इस्तेमाल महीं करें पूर्ण है और सौन्दर्य को समझना चाहिए। गया है। बनाऐंगे। कि जो आदमी आपसे मिले या जिस तरह से आप अपने को सौन्दर्यं सजाएगे इसी तरह से आप उसके वातावरण मतलब नहीं। कोई ढोंगबाज़ी नहीं 3 20011231_New Year Puja - You Should Be Satisfied Within_Kalwe.pdf-page4.txt Original Transcript : Hindi और बच्चों को भी बचाना चाहिए दूसरी बात सहजयोग में मैंने देखा कि अब जिस दशा में आप आएँ अब आप उस सब लोग चाहते हैं कि मैं उनके धर जाऊँ। समाधान को प्राप्त हों और देखें कि आप आप क्यों नहीं समझते कि मैं आपके घर जो भी कर रहे हैं उससे आपको समाधान आऊँ, ऐसा आपने क्या किया? या फिर मिलें । जिसको देखो वही हमारे घर आना चाहता है! मैं कहीं भी जाती हैँ मुझे आराम से सहजयोग बढ़ाएँ आप बहुत समाधानी हो रहने नहीं देते आपने अभी कुछ भी नहीं जाएँगे आपको यह नहीं लगेगा कि माँ के किया है। आप किसी भी तरह से ये इच्छा बनी रहें अधिकतर मैंने ऐसा देखा है कि जो रहने दीजिए और ये सोचिए कि अभी लोग बहुत आगे-आगे करते हैं वो या तो आपकी औकात क्या है? आप क्या चाहते बेईमान होते हैं और या तो वो चोर होते हैं? ऐसी क्यों चाहत करें जिससे आपकी हैं। जो लोग दिल से साफ हैं और जो माँ को तकलीफ हो। ऐसे क्यों काम करना जैसे हम कहीं से आए, आकर सामने खड़े हैं। अब मैं चाहती हैँ कि अब ये समय आ हो गए। ऐसा नहीं करिए। समाधान अगर गया है कि आप लोग अब मेरे ऊपर सहजयोग में नहीं आया तो आप बेकार हैं। मेहरवानी करें क्योंकि मुझसे तो सब जहाँ भी हैं, माँ हमारे साथ हैं, इस प्रकार एक समाधानी वृत्ति होनी चाहिए। उसी से आप लोग ठीक नहीं हैं तो मेरी तबियत आपकी प्रगति होगी। जिस चीज़ की दुनिया खराब हो जाती है। इसलिए आप को में प्रगति होती है. वो सब कुछ समाधान में बिल्कुल ये निश्चय कर लेना चाहिए कि रत है। जब आम स हम ऐसे बने कि जिससे माँ जो है वो खुश समय आप दबते रहें सबके सामने तो हो जाएं और फिर उससे जो है दुनिया उससे क्या फायदा? समाधान से जहाँ आप बदल जाए। आज बहुत देर तक लोग बैठे हैं वहीं माँ है ऐसा जब आपको महसूस रहे, कुछ गए भी होंगे पहचान ये ही है होगा तभी माना जाएगा कि आप सहजयोगी कि आप यहाँ बैठे हैं। शान्ति में बैठे हैं हैं। जहाँ बैठे हैं, सामने आना, स्टेज पर पहले तो धूम धड़ाका सब लोग इतनी चढ़ना, इसकी ज़रूरत नहीं किसी समाधानी आदमी को। हमें सबके बारे में मालूम है शांत बैठे हैं ये मेरे लिए तो बहुत ही पर समाधान ऐसी चीज़ है कि जिससे कमाल ही चीज है । गहराई में आप मुझे पा सकते हैं और मैं आपको जान सकती हैं। मैं चाहती हैं कि आप सहजयोग में कार्यरत हों और सामने सारी चीजें रखें माँ के सामने खड़े 1 है वो अपने प्यार में मग्न रहते प्यार में रत Vibrations आप खींचते हो और अगर माघानी नहीं और पूरे जोर-जोर से चिल्लाते थे, बोलते थे अब परमात्मा आपको धन्य करें। 4 20011231_New Year Puja - You Should Be Satisfied Within_Kalwe.pdf-page5.txt ENGLISH TRANSLATION (Hindi Talk) Today I got late and it is the power of your love which has brought Me here. Your Mother's health is little disturbed and the desire is very strong and things are working out because of that. I want that your power of desire should get stronger, too. You should think for yourself what you have done in this regard. You should introspect and see that what hard work have you done for it. You meditate.... You should bring depth in your meditation. You should think that you are a saint and see what you should do. Mother has made you a saint and now what should you do? You have to make yourself all right. No doubt, you should make yourself all right, but after that when it is done, then what do you do? You go in collectivity. You go into programs and it is limited to that. What have you done further? You have got this blessing through your spirit. Spirit has given you second birth, so you should see further now what are you doing? How are you progressing or are you are using it only for yourself and for your children? It is very important because I have seen that even after getting Self Realization, people have short-comings. They are not completely cleansed. If you don't get one together with the others and work for Sahaj Yoga, then you will never come to know that what short-comings and negative aspects you have within. Even people come and make money.... There are many people who come to Sahaj Yoga and make money. Later on they are exposed, no doubt, and can be seen, but unnecessarily it is troublesome, so what is the use? You have not come here to make money. You have come here to awaken your dharma. You should establish dharma. I have heard that in Bombay many kind ofadharmas have started, which were not at all here in the past twenty-five years should not at all see such films. If you people don't see such movies, then they will not be shown at all, they cannot run. You can understand it that no one likes such movies. People want that such movies should be made which the whole family can go and see together. This is one thing and there are all these filthy and stupid horrible kind of books that are read nowadays. I know that you people don't read them. But even in the newspapers they write many obscene things. So you have to make yourself nirmal [pure]. It is seen that the eyes of the people run here and there. Those people are not Sahaj Yogis at all whose eyes flitter here and there. Your eyes have to be steady. This is the first sign of a Sahaj Yogi. If still your eyes are moving here and there, then you should say that he is not yet a Sahaj Yogi. Second thing is greed. If still you have greed, then you are still not a Sahaj Yogi and this greed will be exposed one day. especially the films. There is very little purity in them. You First thing is that this greed should go away. Shri Krishna has said that you must drop your anger. If you get angry, then you should think that you are not a Sahaj Yogi. Nobody has seen Me getting angry. Everyone says that, 'Mother we have not seen you getting angry.' There are situations in which anyone can get angry, but I say, 'What is the use?" There is no use. What I have to tell you today is that you should introspect and see all the weaknesses you have even now. So I tell you the same thing, that you should cleanse yourself. You should have the nirmal tattwa in you. All your weaknesses should go away from that. What is the use of keeping these weaknesses within? Many of them have gone to jails and those that haven't, people spit on them. I want to tell you only one thing, that don't look at the weaknesses and faults of others. Instead, you should see the faults within yourself. Do you still get angry? Do you still have desire in your eyes and do you have attraction for everything, always thinking to buy this and buy that, to bring this and bring that? This was the most in America, but America today got pressed by a big shock. Like a mad person buys this ... but if you have to purchase, only then purchase such things which are made by hand, which has art in it and you can see the creativity in it. There are so many artists who 5 20011231_New Year Puja - You Should Be Satisfied Within_Kalwe.pdf-page6.txt English Translation (Hindi Talk) make such nice things and no one will buy them. They will buy all unnecessary things. By these things neither you will be benefited nor those who make such beautiful things. You should get artistic. All the things in the house should get artistic. They will keep fifty kinds of utensils in the house and you find not even one proper utensil. There should be utilization of handmade, artistic things by you, if you are Sahaj Yogis. You keep on buying the things which have no use. The women will keep buying one sari after another and not even one sari will be proper – all such saris, in which they make so weird [perhaps "strange" would be better] things like bhoots. You should keep two saris which are nice, handmade and beautiful instead of keeping fifty saris. In our country still there is no appreciation of art and creativity. When I go to some house I see that they have painted their houses with weird [perhaps “strange" would be better], bhootish colours, bhootish decorations. You are Sahaj Yogis and you should understand what object is beautiful and understand beauty. Only then will you be able to make your life beautiful and so that any man or women who meets you will say that what a nice man or women he or she is. As beautifully you will decorate yourself... in the same way, you should decorate your environment and houses. It is the thing to see, that if a Sahaj Yogi is roaming like a bhoot, then what is the use of such Sahaj Yogi. To wear the clothes properly, to talk properly, to behave properly with others, to decorate your house with beautiful things.... You can decorate your house with flowers also. Have a garden means you should have the vision of beauty in Sahaj Yogis. There are so many useless things stored in the house because there are markets and they go to markets and buy all useless things. You should burn the Holi [festival in India when they play colors, but one night before they burn the big fire] of all such useless things. This plastic has become so much important now. Even if I have to search for a glass, it will be of plastic. I said it is too much. I cannot use plastic. There are saris of plastic. Use of plastic has come that there is great possibility of human beings getting sick out of it. Children die by plastic. As much as possible, you should not use plastic. But now plastic has come in everything. Especially in Bombay, even the sofa set is made of plastic. To sit on plastic, to wear plastic, to walk on plastic and after some time the cars will also be of plastic. So you /Sahaj Yogis] have no concern with plastic. I don't say that you should wear a gown and walk in Sahaj Yoga. You should wear proper clothes, no such thing is there that you look like a sadhu baba [Hindu saints who leave their home and family], no such artificiality, but you should be away from all such things which are not auspicious for you. You should not use it and you should save your children from it. Second thing which I have seen in Sahaj Yoga is that everyone wants that I must visit their houses. Why don't you understand that what have you done that I should come to your house? Or whomever you see wants to come to My house. Wherever I go, you should leave Me peaceful. You have not done anything till now. You should leave this kind of desire in your mind and think that what is your aukat [status]? Why do you desire such a thing, which can give trouble to your Mother? Why to do such things like.... I come from somewhere and they stand in front of me. Not to do like this. If you don't have samadhan [ultimate satisfaction] in Sahaj Yoga, then you are of no use. 'Wherever I am, Mother is with me.' Such kind of samadhan should be within you. You will grow with this. Anything which grows in this world is all absorbed in samadhan. If you are not samadhani and keep running in front of everyone all the time, what is the gain from that? With samadhan, Mother is there where you are. When you think like this then you will be considered a Sahaj Yogi. Wherever you are sitting...coming in front of Me ... coming on stage... it is not required for a Sahaj Yogi. 6. I know about everyone. Samadhan is such a thing that in the depth of it you can meet Me and now the time has come where you should achieve samadhan. You should see that whatever you are doing, you should get satisfaction. You should come forward to spread Sahaj Yoga and work for Sahaj Yoga, you will see that you will achieve the samadhan. You will not feel like coming in front of Me and telling Me everything. Most of the time, I have seen that all those who come too much forward and in 6. 20011231_New Year Puja - You Should Be Satisfied Within_Kalwe.pdf-page7.txt English Translation (Hindi Talk) front of Me are either dishonest or thieves.../short pause]. Those who are clean in heart and are enjoying the love are lost in thejoy of love within. So now I want to tell you that the time has come that you should have a little consideration for Me because you absorb all the vibrations from Me and if you people are not all right, then I get sick. So you have to decide seriously that we should become such that Mother should be happy to see us and then the whole world should change. You had to sit for a long time today and many people have gone, but the recognition is this that you people are sitting peacefully in front of Me. Before it used to be that people used to talk and shout, make noise, but you are sitting peacefully. This is very great thing for Me. I'm telling them that how a Sahaja Yogi should feel. You should be satisfied people. Firstly and foremost you have to be satisfied. You just see within yourself if you are satisfied or not. You've got the highest that you wanted, you have got the peace, you've got the joy, and all the blessings of the Divine. Despite that, if you are dissatisfied, you want to do something always that is disturbing. Always some people want to show Me off, want to come forward – or they want to escape Sahaja Yoga. Firstly, you must spread Sahaja Yoga. How many people have you brought to Sahaja Yoga? Just think of it! We are Sahaja Yogis – Sahaja Yogis means what? You are saints! In this world all the saints who became saints, with very great difficulty, going through lots of tortures, have done so much work. One single saint has so many people whom they have attracted. Of course he couldn't give them Realisation, because I have taught you how to do that. But you just find out what are you doing about Sahaja Yoga. Only meditation is not the point. Meditation for what? For equipping yourself to help others; we need it very much in this Kali Yuga, people who will go all out to help. On the contrary, I find that they are very anxious just to meet Me, to see Me. I have seen all the Indians who come to Cabella must meet Me, must see Me, as if they have a special right with Me. What is the need? What is the need to meet Me? But this is the trouble of, say, our conditioning, that supposing there is some leader, some Minister coming, everybody will go and show off, like to meet him and talk to him – but not a Sahaja Yogi. You must have self-esteem. Self-esteem by which you should know what is your dignity and how you should be. There are Sahaja Yogis who are excellent, who are very good, who are very self satisfied–I know who they are. And you have to be like that, otherwise you cannot enjoy Sahaja Yoga, you are like all other people trying to hinder into all nonsensical activities. Now this is it. Today's was a real test, because I just couldn't come earlier. You know what is the traffic nowadays, I just couldn't arrive; and still you were sitting here – this gives me great satisfaction. That they really love Me, and they are really Sahaja Yogis. If you really love Me you must love others who are not Sahaja Yogis and try to give them Realisation. Because you know My age is quite a lot, and how far can I go? I am not going now to many countries, but Sahaja Yoga is growing fast, though I am not going there. It is growing – why? Because people of that country understand their responsibility. You should know what is your responsibility- it is not only towards yourself but it is for the rest of the world, (that) you have to work it out and do something about it. Whatever people you can approach, or whatever people you can meet, go all out! I have also said before, I have seen people who go to some horrible gurus go on talking about their guru, describing their guru. Anybody who meets them, they go on telling them. Not Sahaja Yogis. I don't know, maybe they want to preserve their Realisation. They think if they tell somebody their Realisation will drop out. If you don't spread Sahaja Yoga, what is the use of getting your Realisation? All my labour is wasted on such people, who are for themselves. They want something for themselves. Now for example, so many girls wanted to marry. There are four times more, five times more than all the boys put together. But if they are not married, they feel very unhappy about it. Doesn't matter! You are now connected to God! Marriage is not always a very great blessing, I tell you, it's not. On the contrary, it can be very binding, it could be very troublesome. So better not feel bad. You should feel 20011231_New Year Puja - You Should Be Satisfied Within_Kalwe.pdf-page8.txt English Translation (Hindi Talk) bad when you cannot give Realisations to others. How many people have I given Realisation? Just think about it. All the time, like all the ordinary people, thinking about marriage, and this and that. It's not going to help you. You are something special. And what speciality do you have? What are you doing about it? I'm sorry at the end of this, our great Ganapatipule, I have to tell you this. But sometimes one has to tell, also. I know you are all, all very good Sahaja Yogis. Also that you have achieved so much. But what is My desire is, that all of you should become like a light and start spreading Sahaja Yoga. In some countries it has happened, it is working out, and people feel so responsible. I am amazed at them, how they are spreading Sahaja Yoga. Now the same request I have to make to you. That please look at yourself, introspect, what have you done? What have you achieved in Sahaja Yoga? Such a satisfaction lies when you really, when you really work hard to spread Sahaja Yoga. Many people think that coming nearer Me I feel pleased – I am not. That's no recognition. You should never do that. On the contrary, when you will grow really, I will know, Myself. Today is not the day I should have said all this, because it is the day for New Year's Day. But only good decisions are to be taken on the New Year's Day – that's the custom with human beings. So today you all have to take the decision that 'What are we doing for Sahaja Yoga?' 'What are we giving Sahaja Yoga?' 'What is our achievement?" 'Are we sharing with others?' It's the greatest Truth you have got. Nobody got it– people worked so hard, did so much – nobody could give Realisation! It's only you can give Realisation, it's very surprising. Kabir could not give Realisation to anybody. Gyanadeva could not give Realisation to anybody. All of them have been great, great Saints of great value system and with great understanding. Whatever poetry they have given, people are singing- that's all. But, they cannot give Self Realisation which you can do. With all that power, if you are not giving Realisation, what's the use of giving power to someone like that? So today's New Year's message is that 'Next year you must give Self Realisation to many people. (To) How many people have you given Realisation?' That's the main thing. Just find out. What have you done throughout the year? I don't know how to count it. But you, yourself count. 'What have we done all these years?' 'What have we achieved?' Attending My Puja is no favour to Me. Or doing anything for the Puja is no favour to Me. My greatest Puja is that of human beings; and if you can achieve and spread Sahaja Yoga that fast, I'll be very, very grateful to you. I have worked very hard, I have really worked very hard. This Body, this Mind, all My Health, everything, I have done for saving people. And you please also tonight decide and take a view that what Mother is saying is very important and precious. We have to, we have to rise and give Realisation to people. But which is not so common-I am surprised why people are behaving in this manner who are Realised Souls. All my blessings for the New Year, for all of you 'Happy New Year'! But – next year should be full of many Sahaja Yogis who have done work and who have achieved something great. May God bless you! 8. 20011231_New Year Puja - You Should Be Satisfied Within_Kalwe.pdf-page9.txt MARATHI TRANSLATION (Hindi Talk) Scanned from Marathi Chaitanya Lahari आपल्या सर्वांच्या प्रेमाखातर मी इथे आले आहे. माझी प्रकृति तशी ठीक नाहीं पण इच्छाशक्ति जबरदस्त आहे. म्हणूनच सर्व काही व्यवस्थित बालले आहे. तुम्हा सर्वांची इच्छाशक्ति पण अशीच जवरदस्त व्हायला हवी असे मला वाटते. त्याबाबतीत आपण करत आहोत हे तुमचे तुम्हीच पाहयचे अहे. आपण काय करती व काय करायता पाहिले याचा तुम्ही स्वत:शीच वबिचार करायला हवा. आत्म्याकडून तुम्हाला पुनर्जन्म दिला आहे, भ्रान्तिमधून बाहेर काढले आहे तेव्हां त्यातून पुढची प्रगति साध्य करण्याकडे तुम्ही लक्ष द्यायला हवे; आपल्याला मिळालेल्या शक्तीचा उपयोग केला पाहिजे, जोपर्यंत दुसऱ्या लोकांना सहजयोग सांगून जागृत करण्याचे कार्य तुम्ही करत नाहीं तोपर्यंत तुम्हाला मिळालेली शक्ति तुम्ही समजूच शकणार नाही व तुमचे दोष ি तुम्हाला समजणार नाहीत. मी बरेच लोक-असे बघितले आहेत की ते सहजयोगांत आल्यावरही पैसा कमवायच्या मार्ग असतात. काही जण त्यातून सुधारतात. पण अशा संवयींचा फायदा काय? आजकाल या मुंबई शहरामधें लोकांना सिनेमाचा घोक आहे, तसे मुंबईमधे बच्याच अधार्मिक गोष्टी चालतात. आजकालच्या सिनेमांत अशुध्दता मोक्या प्रमाणात दाखवतात; खरे तर सगळ्या कुटुंबाला बरोबर पेऊन बपण्यासारखा सिनेमा लोकांना आवडेल. त्याच प्रमाणे गल्ली-गल्ली मधून अत्यंत वाईट प्रकारचे धंदे चालतात. वर्तमानपत्र ब मासिकांत अश््ील गोष्टी छापून बेतात. हे सर्व सुधारले पाहिजे व बातावरण निर्मल झाले पाहिजे. त्यासाठी दृष्टिमधे निर्मलपणा आला पाहिजे. स्तब्ध व निश्चल नजरेत पावित्य असते; ज्याची नजर सदैद भरकटत राहते तो सहजयोगी जहेच. दुसरी गोष्ट म्हणजे लोभ व हांवः कसल्याही गोष्टीच लोभ वाटता कामा नये. त्याचप्रमाणे राीटपणा सुटला पाहिजे. ज्याला राग येतो तो सहजयोगी नाही. राग मनातूनही गेला पाहिजे. कळवा पुजा प.पू.श्रीमाताजी निर्मला देवींचे भाषण,(सारांश) कळवा, ३१ डिसेंबर २००१ ८ ा सर्वात महत्वाची गोष्ट म्हणजे समाधान, तुम्ही जेव्हा सहजयोगाचे कार्य करता तेव्हा तुम्हाला फार समाधान मिळते. आपण जे कांही करतो त्यातून समाधान मिळाले पाहिजे. सहजयोगाच्या कार्यातही समाधान मिळवले पाहिजे. नुसते सगळे श्रीमाताजीना माहीत आहे असे समजण्यांत अर्थ नाही. सहजयोगांतही ज्यांना सारखे पुढे येण्याची धडपड असते त्यांत अधिकतर बेईमान व चोर तोक असतात,जे लोक अंत:करणाने साफ असतात व प्रेमाने क्यवहार करतात ते समाधानात असतात. आतां मला वाटते की समय आला आहे; तेव्हां तुम्ही माझ्यावर एक मेहरबानी करा; तुम्ही माझ्याकडू न व्हायद्रेशन्स खेचून घेत असल्यामुळे तुम्ही जर सहजयोगी म्हणून ठीक नसाल तर माझी पकृति बिघडते. तेव्हा तुम्ही आता, निश्चय केला पाहिजे की ज्यामुळे श्रीमाताजींना बास होऊन त्यांची तब्येत बिघडेल असे तुम्ही कांहीं करणार नाहीं सहजयोगी ग्हणवूल घ्यायला आपण लायक राहिलो नाही तर श्री माताजी ना त्रास होईल. वे मला प्रसन्नता मिळेल असे बागाल. आपल्याला जग बदलायचे आहे. इ्े तुम्ही बराच वेळ बसून आहात. तुम्हीं तरीही निरवंतपरणे शांता राहण्यांत तुमची खरी ओळख आहे. तुम्हाला असे शांत असल्याचे पाहण्यात मला फार आनंद होत असतो. म्हणून सहजयोग्यांनी स्वतःअद्दल फार काळजीपूर्वक राहिले पाहिजे. नुसते रोज ध्यान करण्याने कांही साध्य होत नाहीं. तुम्ही सहजयोगात दुसर्यांना मदत करण्यासाठी, या कलियुगातून 20011231_New Year Puja - You Should Be Satisfied Within_Kalwe.pdf-page10.txt Marathi Translation (Hindi Talk) त्यांना बाचवण्यासाठी आला आहात. नुसते मला आपण सहजयोगासाठी काय केले, काय करतो हकडे लक्ष द्या. भेटम्यासाठी' वा माझे जवळून दर्शन होण्यासाठी धडपड़ण्याला अर्थ नाही. सहजयोगाच्या प्रसारासाठी अंग झटन कार्य करणे यासारखी समाधानकारक भारतीय सहजयोग्यांत ही प्रवृति जास्त आहे. सहजयोग्यांती आपला व आनंददायक गोष्ट नाही. नवीन बर्ष सुर होतांना कांहीतरी नवीन संकल्पना आत्मसन्मान राखता पाहिजे. सामान्य लोकांसारख वामलात तर तुम्हाला निश्चित करण्याची प्रधा आहे. म्हणून आज तुम्ही प्रत्येकाने आपण सहजयोगाचा खरा आनंद मिळणार नाहीं, माझ्यावर जितके तुम्ही सहजयोगासाठी बाय करणार याचा निश्चय करा. नुसत्या माझी पूजा करण्याचा प्रेम करतां तसेच प्रेम आजून सहजयोगांत न आलेल्या किंवा पूजा-कार्यक्रमासाठीं काम करण्याचा कांही फायदा नाही. लोकांबद्दलही तुम्हाल्ा वाटले पाहिजे. आत्मसाक्षात्कार देण्याची तळमळ तुमच्यांत असली पाहिजे, मी आता नाहीत; मोठ-मोठ्या] संत पुरुषांनीही ते बमले नाहीं; पण तुम्हाला ती परदेशांत कमी जाते पण तिथे सहजयोग बाढहत आहे कारण त्या लोकांना शक्ति मिळाली आहे. म्हणून सहजयोगाचा प्रसार करण्याचा व जास्तीतजास्त त्याची जबाबदारी आपल्यावरच आहे हे समजले आहे. म्हणून तुम्ही लोकांना जागृति देण्याचा ठाम निश्चय आज करा. सहजयोगाचें असे कार्य सहजयोग सतत लोकांना सांगत राहिले पाहिजे. नाहीं तुम्ही केलेत तर तुमचेच माझ्यावर मोठे उपकार होणार आहेत, व जगभर तर तुम्हाला मिळलेला आत्मसाक्षात्कार व्यर्थ होईल, तीच गोष्ट सहज रहजयोग पसरवण्याचे माझे स्वप्न साकार होणर आहे; त्यांतच माझ्या विवाहाची, सहजयोगांत विवाह जमलाच पाहिजे म्हणून अस्वस्थ होऊ आजप्यंतच्या परिश्रमांचे सार्थक होणार आहे. नका. गणपतिपुळयातही मी त्याबद्दल बोलले आहे: सेमिनारमधे असे बोलायला बरं वाटत नाहीं पण या गोष्टी महत्वाच्चा असल्यामुळे सांगाव्या लागतात. माझी इच्छा हीच आहे की तुम्ही तेजस्वी तान्यांसारखे बनावे व आपला प्रकाश सगळीकडे पसरवा। त्यासाठीं सतत आत्मपरीक्षण कर्न स्याना आत्मसाक्षात्कार देण्यावी शक्ति आजपर्यंत कुणी मानवाला देऊ शकले का नववर्षाचे तुम्हाला अनंत आशीर्वीद, 10